+ सर्वथा हेतु सिद्ध या आगम सिद्ध तत्त्व बाधित है -
सिद्धं चेद्धेतुत: सर्वं न प्रत्यक्षादितो गति:
सिद्धं चेदागमात्सर्वं विरुद्धार्थमतान्यपि ॥76॥
अन्वयार्थ : [हेतुत: सर्वं सिद्धं चेत् प्रत्यक्षादित: गति: न] यदि सभी तत्त्व हेतु से सिद्ध हैं तब तो प्रत्यक्षादि प्रमाण से किसी वस्तु का ज्ञान नहीं हो सकेगा [आगमात् सर्वं सिद्धं चेत् विरुद्धार्थमतानि अपि] यदि आगम से सभी तत्त्व सिद्ध माने जावेंगे, तब तो विरुद्ध अर्थ को कहने वाले आगम भी प्रमाण हो जावेंगे।

  ज्ञानमती 

ज्ञानमती :


यदी हेतु से सभी तत्त्व की, सिद्धी मानी जाए सही;;तब प्रत्यक्ष अनुमान आदि से, वस्तुस्थिति अरु ज्ञान नहीं;;यदि आगम से सभी तत्त्व को, सच्चे सिद्ध कोई करते;;तब विरुद्ध मत वाले आगम, से विरुद्ध मत सच होंगे
यदि सभी तत्त्व एकांत से हेतु से ही सिद्ध होते हैं तब तो प्रत्यक्ष आदि प्रमाणों से किसी तत्त्व की सिद्धि नहीं हो सकेगी। यदि सभी तत्त्व आगम से ही सिद्ध माने जायेंगे, तब तो विरुद्ध अर्थ के प्रतिपादन करने वाले मत भी आगम से सिद्ध हो जावेंगे।