
ज्ञानमती :
साध्य हेतु का ज्ञान यदी, बस ज्ञान मात्र माना जावे;;तब तो साध्य नहीं होगा, हेतू दृष्टांत नहीं होंगे;;चूँकि ‘प्रतिज्ञादोष’ कहा जो, स्ववचन बाधित आवेगा;;‘हेतुदोष’ है असिद्धादि ये, आते सब दूषित होगा
साध्य और साधन की विज्ञप्ति को यदि विज्ञान मात्र ही स्वीकार किया जावे, तब तो प्रतिज्ञा और हेतु के दोष से न साध्य ही सिद्ध होगा न हेतु एवं दृष्टांत ही बन सकेंगे।भावार्थ-प्रतिज्ञा दोष अर्थात् स्ववचन विरोध होता है और हेतु दोष अर्थात् असिद्ध, विरुद्ध, अनैकांतिक दोष आते हैं। साध्य सहित पक्ष के कहने को ‘प्रतिज्ञा’ एवं साधन के वचन को हेतु कहते हैं। विज्ञानाद्वैतवादी बौद्ध सभी तत्त्वों को ज्ञान मात्र ही कहता है तब साध्य और साधन व्यवस्था कैसे बनेगी ? |