+ क्या अज्ञान से बंध और अल्पज्ञान से मोक्ष होता है ? -
अज्ञानाच्चेद्ध्रुवो बन्धो, ज्ञेया ऽनन्त्यान्न केवली
ज्ञानस्तोकाद्विमोक्षश्चेदज्ञानाद्बहुतोऽन्यथा ॥96॥
अन्वयार्थ : [चेत् अज्ञानात् ध्रुवो बंधो ज्ञेयानन्त्यात् केवली न] यदि अज्ञान से निश्चित बंध होता है तब ज्ञेय पदार्थ अनंत है उनका ज्ञान न हो सकने से कोई भी केवली नहीं हो सकता है [चेत् ज्ञानस्तोकात् विमोक्ष: बहुतो अज्ञानात्अन्यथा] यदि अल्पज्ञान से मोक्ष होता है तब उसी जीव के बहुत सा अज्ञान रहने से बंध भी होता रहेगा पुन: मोक्ष नहीं हो सकेगा।

  ज्ञानमती 

ज्ञानमती :


यदि अज्ञान बंध का हेतू, निश्चित है मानो, तब तो;;ज्ञेय पदारथ कहे अनन्तों, कोई केवली कैसे हो?;;अल्पज्ञान से यदि मुक्ती हो, तब तो उसका बहु अज्ञान;;बंध हेतु होगा निश्चित तब, नहीं किसी को मुक्तिलाभ
यदि सांख्य मत के अनुसार अज्ञान से बंध अवश्यंभावी मानों तब तो ज्ञेय पदार्थों के अनन्त होने से कोई केवली नहीं बन सकेगा। यदि एकांत से अल्पज्ञान से ही मोक्ष मानी जावे, तब तो अवशिष्ट बहुत से अज्ञान से अन्यथा-बंध की प्राप्ति हो जावेगी।