
ज्ञानमती :
यदि अज्ञान बंध का हेतू, निश्चित है मानो, तब तो;;ज्ञेय पदारथ कहे अनन्तों, कोई केवली कैसे हो?;;अल्पज्ञान से यदि मुक्ती हो, तब तो उसका बहु अज्ञान;;बंध हेतु होगा निश्चित तब, नहीं किसी को मुक्तिलाभ
यदि सांख्य मत के अनुसार अज्ञान से बंध अवश्यंभावी मानों तब तो ज्ञेय पदार्थों के अनन्त होने से कोई केवली नहीं बन सकेगा। यदि एकांत से अल्पज्ञान से ही मोक्ष मानी जावे, तब तो अवशिष्ट बहुत से अज्ञान से अन्यथा-बंध की प्राप्ति हो जावेगी।
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