+ अज्ञान से बंध एवं अल्पज्ञान से मोक्ष की सुंदर व्यवस्था -
अज्ञानान्मोहिनो बन्धो नाऽज्ञानाद्-वीतमोहत:
ज्ञानस्तोकाच्च मोक्ष: स्यादमोहान्मोहिनोऽन्यथा ॥98॥
अन्वयार्थ : [मोहिनो अज्ञानात् बंध: वीतमोहत: अज्ञानात् न] मोह सहित अज्ञान से बंध होता है एवं मोहरहित अज्ञान से बंध नहीं होता है [अमोहात् ज्ञानस्तोकात् च मोक्ष: स्यात् मोहिनो अन्यथा] मोह रहित अल्पज्ञान से मोक्ष होता है और मोह सहित अल्पज्ञान से बंध ही होता है।

  ज्ञानमती 

ज्ञानमती :


स्याद्वाद में मोह सहित, अज्ञान बंध का कारण है;;मोहरहित अज्ञान बहुत भी, नहीं बंध का कारण है;;अल्पज्ञान भी मोहरहित है, उससे मोक्ष प्राप्त होगा;;किन्तु मोहयुत बहुत ज्ञान से, कर्मबंध निश्चित होता
मोह सहित अज्ञान से बंध एवं मोह रहित अज्ञान से बंध नहीं होता है। मोह रहित अल्पज्ञान से भी मुक्ति होती है किन्तु मोह सहित ज्ञानस्तोक से मुक्ति प्राप्त नहीं हो सकती है।