+ स्वव्यवसाय का दृष्टान्त -
अर्थस्येव तदुन्मुखतया ॥7॥
अन्वयार्थ : जिसप्रकार पदार्थ के प्रति सन्मुख होने से पदार्थ का निश्चय होता है अर्थात् ज्ञान होता है, उसीप्रकार स्व की ओर उन्मुख होने पर स्व का निश्चय होता है।
Meaning : As one comes to know the object-of-knowledge (artha) after directing attention towards it.

  टीका 




loading