
न हि तत्साध्यप्रतिपत्त्यङ्गं तत्र यथोक्त हेतोरेव व्यापारात् ॥34॥
अन्वयार्थ : [तत्साध्यप्रतिपत्त्यङ्गं] वह साध्य के ज्ञान में कारण [न] नहीं है [हि] क्योंकि [तत्र] वहाँ साध्य के ज्ञान में [यथोक्त] यथोक्त [हेतोः] हेतु का [एव] ही [व्यापारात्] व्यापार होता है।
Meaning : The example is not a cause of the knowledge of the object-to-be-proved because the knowledge of the object-to-be-proved depends only on the suitable means or the middle-term .
टीका