व्यक्तिरूपं च निदर्शनं सामान्येन तु व्याप्तिस्तत्रापि तद्विप्रतिपत्तावनवस्थानं स्याद् दृष्टान्तान्तरापेक्षणात् ॥36॥
अन्वयार्थ : [निदर्शनं] निदर्शन (उदाहरण) [व्यक्तिरूपं] व्यक्तिरूप होता है [तु] परन्तु [व्याप्तिः] व्याप्ति [सामान्येन] सामान्यरूप से (सर्वदेश काल की उपसंहार वाली) होती है [तत्रापि] उस उदाहरण में भी [च] और [तद्विप्रतिपतौ] उस सामान्य व्याप्ति में विवाद होने पर [दृष्टान्तान्तरापेक्षणात्] दृष्टान्त को अन्य दृष्टान्त की अपेक्षा होने से [अनवस्थानम्] अनवस्था दोष प्राप्त होगा।
Meaning : The example (udaharana) pertains to particularity and the infallible-concomitance (vyapti, avinabhava) is for all regions and time. In case of disagreement with the example (udaharana) given, another example will be required and that would lead to the fault (dosha) of endless-series (anavastha).

  टीका