+ विरुद्धोत्तरचरोपलब्धि हेतु -
नोद्गाद् भरणि: मुहूर्तात्परं पुष्योदयात् ॥72॥
अन्वयार्थ : एक मुहूर्त पहले भरणी का उदय नहीं हुआ है, क्योंकि अभी पुष्य नक्षत्र का उदय पाया जा रहा है ।

  टीका