टीका
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प्रमाण से फल भिन्न या अभिन्न?
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प्रमाणादभिन्नं भिन्नं च ॥2॥
अन्वयार्थ :
वह प्रमाण का फल संज्ञा, स्वरूपादि भेद की अपेक्षा से कथञ्चित् अभिन्न है।
टीका