टीका
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पक्षाभास
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तत्रानिष्टादिः पक्षाभासः ॥12॥
अन्वयार्थ :
उनमें अनिष्ट आदि
(बाधित, सिद्ध)
को पक्षाभास कहते हैं ।
टीका