टीका
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अनिष्टपक्षाभास
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अनिष्टो मीमांसकस्यानित्यः शब्दः ॥13॥
अन्वयार्थ :
मीमांसक का कहना है कि शब्द अनित्य है, यह अनिष्ट पक्षाभास है।
टीका
टीका :
मीमांसक के द्वारा शब्द को नित्य माना गया है। इसलिए उसके प्रति शब्द अनित्य ऐसा कहना अनिष्टपक्षाभास होता है।
मीमांसक लोग नित्य को मानते हैं, अतः उन्हें नित्य इष्ट है परन्तु उसके लिए अनित्य कहना ये अनिष्ट पक्षाभास हो जायेगा।