टीका
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बाधितपक्षाभास
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बाधितः प्रत्यक्षानुमानागमलोकस्ववचनैः ॥15॥
अन्वयार्थ :
बाधितपक्षाभास प्रत्यक्ष, अनुमान, आगम, लोक और स्ववचन से बाधित होता है।
टीका