+ असिद्ध हेत्वाभास का दूसरा भेद -
अविद्यमाननिश्चयो मुग्धबुद्धिं प्रत्यग्निरत्रधूमात् ॥25॥
अन्वयार्थ : मुग्ध बुद्धि पुरुष के प्रति कहना यहाँ अग्नि है धूम होने से। यह अविद्यमान निश्चय वाले संदिग्धासिद्ध हेत्वाभास का उदाहरण है।

  टीका 

टीका :

अज्ञानी पुरुष से कहना कि यहाँ अग्नि है, धूम होने से, इस प्रकार का कथन उनके लिए असिद्धहेत्वाभास है।