
तस्य वाष्पादिभावेन भूतसंघाते सन्देहात् ॥26॥
अन्वयार्थ : क्योंकि उसे भूतसंघात में भाप आदि के रूप से संदेह हो सकता है। भूतसंघात -चूल्हे से उतारी हुई बटलोई, क्योंकि उसमें पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु चारों रहते हैं और भाप भी निकलती रहती है।
टीका
टीका :
अज्ञानी मूर्ख के प्रति धूम हेतु इसलिए सन्दिग्धासिद्ध हेत्वाभास है, जिससे उसके भूतसंघात में वाष्पादि देखने से संदेह हो जाता है कि यहाँ भी अग्नि है अथवा होगी।
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