
टीका :
पक्ष में अथवा सपक्ष में विद्यमान होकर भी विपक्षवृत्ति वाला हेतु अनैकान्तिक हेत्वाभास है। इस हेतु के दो भेद हैं -1 निश्चितविपक्षवृत्ति, 2 शंकितविपक्ष वृत्ति। पक्ष - संदिग्ध साध्य वाले धर्मी को पक्ष कहते हैं। सपक्ष - साध्य के समान धर्मी को सपक्ष कहते हैं। विपक्ष - साध्य के विरोधी धर्मी को विपक्ष कहते हैं। हेतु का पक्ष और सपक्ष में रहना तो गुण है, परन्तु विपक्ष में रहना दोष है। |