+ भेद-स्‍वभाव -
सद्भूतव्यवहारेण गुणगुण्यादिभिः भेदस्वभावः ॥156॥
अन्वयार्थ : सद्भूतव्‍यवहार उपनय की अपेक्षा गुण-गुणी आदि में भेद-स्‍वभाव है ।

  मुख्तार 

मुख्तार :

सद्भूतव्‍यवहार उपनय का कथन सूत्र २०६ में किया गया है । इस नय का विषय गुण और गुणी में तथा पर्याय-पर्यायी में भेद ग्रहण करना है । अतः इस नय की अपेक्षा गुण और गुणी में तथा पर्याय-पर्यायी में संज्ञा आदि की अपेक्षा भेद है ।