अन्वयार्थ : अशुद्ध पर्याय जिसका प्रयोजन है, वह अशुद्ध पर्यायार्थिक नय है ।
मुख्तार
मुख्तार :
पुद्गल की द्वअणुक आदि स्कंध पर्यायें और कर्मोपाधि सहित जीव की नर, नारक आदि पर्यायें अशुद्ध द्रव्य-पर्यायें हैं । इन्हीं की अशुद्ध गुण-पर्यायों सहित ये सब अशुद्ध-पर्यायें इस नय का विषय हैं ।