पं-रत्नचन्द-मुख्तार
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सद्भूत व्यवहार-नय
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तत्र सद्भूतव्यवहारो द्विविध उपचरितानुपचरितभेदात् ॥223॥
अन्वयार्थ :
उपचरित और अनुपचरित के भेद से सद्भूतव्यवहार नय दो प्रकार का है ।
मुख्तार
मुख्तार :
सद्भूत व्यवहारनय के दो भेद हैं -- उपचरित-सद्भूत-व्यवहार नय और अनुपचरित-सद्भूत व्यवहारनय । सूत्र २२४ व २२५ में क्रमशः इनका स्वरूप कहा जायगा ।