+ सद्भूत व्‍यवहार-नय -
तत्र सद्भूतव्‍यवहारो द्विविध उपचरितानुपचरितभेदात् ॥223॥
अन्वयार्थ : उपचरित और अनुपचरित के भेद से सद्भूतव्‍यवहार नय दो प्रकार का है ।

  मुख्तार 

मुख्तार :

सद्भूत व्‍यवहारनय के दो भेद हैं -- उपचरित-सद्भूत-व्‍यवहार नय और अनुपचरित-सद्भूत व्‍यवहारनय । सूत्र २२४ व २२५ में क्रमशः इनका स्‍वरूप कहा जायगा ।