
विशेषसामान्यविषक्तभेद-
विधिव्यवच्छेदविधायि वाक्यम् ।
अभेदबुद्धेरविशिष्टता स्याद᳭
व्यावृतिबुद्धेश्च विशिष्टता ते ॥60॥
अन्वयार्थ : [विशेष-सामान्य-विषक्त-भेद-विधिव्यवच्छेद-विधयिवाक्यम्] वाक्य विशेष और सामान्य को लिये हुए जो भेद हैं उनके विधि और प्रतिषेध दोनों का विधायक होता है। हे वीर जिन! [ते] आपके यहाँ - स्याद्वाद शासन में - [अभेदबुद्धेः] अभेदबुद्धि से [अविशिष्टता] अविशिष्टता होती है [च] उसी प्रकार [व्यावृत्तिबुद्धेः] भेदबुद्धि से [विशिष्टता] विशिष्टता की [स्यात्] प्राप्ति होती है ।
वर्णी
वर्णी :
विशेषसामान्यविषक्तभेद-
विधिव्यवच्छेदविधायि वाक्यम् ।
अभेदबुद्धेरविशिष्टता स्याद᳭
व्यावृतिबुद्धेश्च विशिष्टता ते ॥60॥
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