+ दृष्टान्त की सार्थकता -
लोइयपरिच्छयसुहो निच्छयवयणपडिवत्तिमग्गो य ।
अह पण्णवणाविसउ त्ति तेण वीसत्थमुवणीओ ॥26॥
लौकिकपरीक्षकसुखो निश्चयवचनप्रतिपत्तिमार्गश्च ।
अथ प्रज्ञापनविषय इति तेन विश्वस्तमुपनीतः ॥26॥
अन्वयार्थ : [अह] और [पण्णवणाविसओ] प्रतिपादन का विषय (जो कहा जा रहा है) [वह) [लोइय] लौकिक (जन और) [परिच्छय] परीक्षक जन को [सुहो] सुख (ज्ञेय हो जाए) [य] और [णिच्छयवयणपडिवत्तिमग्गो] निश्चित ज्ञानमार्ग (के प्रतिपादक) वचन हैं [तेण] इसलिये [त्ति] यह [वीसत्थमुवणीओ] विश्वस्त करने वाला है ।
Meaning : An illustration appeals both to the man of common sense as well as to the man of science with his subtle intellect. It is an easy means of convincing them beyond doubt as regards the significance of a particular proposition.

  विशेष