
एवं 'एगे आया एगे दंडे य होइ किरिया य' ।
करणविसेसेण य तिविहजोगसिद्धी वि अविरुद्धा ॥49॥
एवमेकस्मिन्नात्मनि दण्डे च भवति किया च ।
करण विशेषेण च त्रिविधयोगसिद्धरप्यविरद्धा: ॥४९॥
अन्वयार्थ : [एवं] इस प्रकार [एगे] एक में [आया] आत्मा [एगे] एक में [य] और [दंडें] दण्ड [य] और [किरिया] क्रिया [य] और [करणविसेसेण] करण विशेष से [तिविहजोगसिद्धी] त्रिविध योग सिद्धि [वि] भी [अविरुद्धा] अविरुद्ध है ।
Meaning : This being the case "One soul, one Activity and one Action is established." And it is also not contradictory to say a three fold yoga is possible on the strength of different media .
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