
जे वयणिज्जवियप्पा संजुज्जंतेसु होन्ति एएसु ।
सा ससमयपण्णवणा 'तित्थयराऽऽसायणा अण्णा ॥53॥
ये वचनीयविकल्पा: संयुज्यमानेषु भवन्ति एतेषु ।
सा स्वसमयप्रज्ञापना तीर्थङ्कराशातना अन्याः ॥५३॥
अन्वयार्थ : [एएसु] इन दोनों के [संजुज्जन्तेसु] संयुक्त होने पर [जें] जो [वयणिज्जवियप्पा] कथन करने योग्य विकल्प [होंति] होते हैँ [सा] वह [सूसुमयपण्णवणा] अपने सिद्धान्त की प्ररूपणा है [अण्णा] अन्य [तित्थयरासारणा] तीर्थंकर की आशातना है ।
Meaning : The right Jaina view consists of the combination of these two Nayas with all their attendant statements.
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