
जीवो अणाइणिहणो केवलणाणं तु साइयमणंतं ।
इअ थोरम्मि विसेसे कह जीवो केवलं होइ ॥37॥
तम्हा अण्णो जीवो अण्णे णाणाइपज्जवा तस्स ।
उवसमियाईलक्खणविसेसओ केइ इच्छन्ति ॥38॥
अह पुण पुव्वपयुत्तो अत्थो एगंतपक्खपडिसेहे ।
तह वि उयाहरणमिणं ति हेउपडिजोअणं वोच्छं ॥39॥
जह कोई सट्ठिवरिसो तीसइवरिसो णराहिवो जाओ ।
उभयत्थ जायसद्दो वरिसविभागं विसेसेई ॥40॥
एवं जीवद्दव्वं अणाइणिहणमविसेसियं जम्हा ।
रायसरिसो उ केवलिपज्जाओ तस्स सविसेसो ॥41॥
जीवो अणाइनिहणो 'जीव' त्ति य णियमओ ण वत्तव्वो ।
जं पुरिसाउयजीवो देवाउयजीवियविसिट्ठो ॥42॥
अन्वयार्थ : [जीवो] जीव [अणाइणिहणो] अनादिनिधन है [केवल णाणं] केवलज्ञान [तु] तो [साइयमण्णतं] सादि अनन्त है [इय थोरम्मि] मोटे सामान्य रूप में और [विसेसे] विशेष में [जीवो] जीव [केवलं] केवल ज्ञान रूप [कह] कैसे [होइ] होता है ?
[तम्हा] इस कारण [उवसमियाइ] उपशम आदि [लक्खण] लक्षण की [विसेसओ] भिन्नता से [जीवो] जीव [अण्णो] अन्य भिन्न है और [तस्स] उस की [णाणाइ] पज्जवा] ज्ञान आदि पर्यायें [अण्णे] भिन्न हैं, ऐसा [केइ] कुछ [इच्छंति] कहते हैं ।
[अथ] और [एगंतपक्खपडिसेहे] एकान्त पक्ष के प्रतिषेध में [अत्थ] अर्थ [पुव्वपउत्तो] पहले कहा जा चुका है [तह वि] तो भी [हेउपडिजोयणं] हेतु सम्बन्ध का [इणं] यह [उयाहरणं] उदाहरण [वोच्छं] कहूँगा ।
[जह] जैसे [कोइ] कोई [सट्ठिवरिसो] साठ वर्ष का है [तीसइवरिसो] तीसवें वर्ष में वह [णराहिवो] राजा [जाओ] हुआ था [उभयत्थ] दोनों में यहाँ [जायसद्दो] जात शब्द [वरिसविभागं] वर्ष का विभाग [विसेसेइ] विशेषत: प्रकट करता है ।
[एवं] इस प्रकार [अविसेसियं] सामान्यत [जीवद्दव्वं] जीव द्रव्य [जम्हा] जिस लिए [अणाइणिहणं] अनादिनिधन है और [रायसरिसो] राजा के समान [उ] तो [तस्स] उसकी [केवलिपज्जाओ] केवली रूप पर्याय [सविसेसो] विशेष-सहित है ।
[जीवो] जीव [अणाइणिहणो] अनादिनिधन [जीव] जीव ही है [त्ति] ऐसा [य] भी [णियमओ] नियम से [ण] नहीं [वत्तव्वो] कहना चाहिए [क्योंकि, जं] जो [पुरिसाउय] मनुष्यायुज [जीवो] जीव में और [देवाउयजीविय] देवायुज जीव में [विसिट्ठो] विशिष्ट भेद है, वह नहीं बन सकेगा ।
Meaning : Soul is Anadi-nidhana and perfect knowledge has a beginning and no end. Thus there being a gulf of difference, how can soul become Kevala-rupa.
Therefore, some believe that soul is different due to the differences in characteristics such as Aupasamika etc. and its modificatory changes such as Jnana etc. are also different.
This has been referred to before while controverting Ekanta-paksa. Still, however, I am inclined to cite an example which points to the relationship between Sadhya and Hetu .
Just as the word 'became' in 'A sixty years old man became a king at the age of thirty show's a difference in years."
So also Jiva-dravya without any Visesa is Anadinidhana. Thus a Kevala paryaya just as Raja is a visesa and nothing more.
We cannot make this one-sided statement that the eternal soul is soul and nothing else, that is to say, it is in a general form and none else. Because a soul embodied in a man's frame is treated as different from a soul embodied in a god's frame.
विशेष