+ अभेदवादी का कथन -
भण्णइ संबंधवसा जइ संबंधित्तणं अणुमयं ते ।
णणु संबंधविसेसे संबंधिविसेसणं सिद्धं ॥20॥
अन्वयार्थ : [जह] जिस प्रकार [संबंधवसा] सम्बन्ध के वश से [ते] तुम्हें [संबंधित्तणं] सम्बन्धीपन [अणुमयं] मान्य है [णणु] निश्चय से (वैसे ही) [संबंधविसेसं] सम्बन्ध विशेष (वस्तु) में [संबंधिविसेसणं] सम्बन्ध विशेषता भी [सिद्धं] सिद्ध हो जाती है ।
Meaning : We say if you once admit a general relation of a thing owing to its being related in general to other things, why should you have any difficulty in allowing same particular relation of a thing with another thing with which it is related in a particular way?

  विशेष 

विशेष :

पुन: अभेदवादी कहता है कि जिस प्रकार सामान्य सम्बन्ध के वश से वस्तु में सामान्य रूप से सम्बन्धत्व घटित होता है, वैसे ही सम्बन्ध विशेष में वस्तु में सम्बन्ध की विशिष्टता भी सिद्ध हो जाती है । विभिन्‍न सम्बन्धों के कारण वस्तु में सम्बन्धीपन भी पाया जाता है -- ऐसा हम कह सकते हैं ।