
विशेष :
प्रत्येक कार्य अपने कारण से उत्पन्न होता है, यह एक शाश्वत नियम है । क्योंकि लोक में जो भी कार्य उत्पन्न हुए देखे जाते हैं, उनमे कोई-न-कोई कारण-सम्बन्ध लक्षित होता है। इन कारणों के सम्बन्ध में ही यहाँ पर विचार किया गया है । कोई काल को कारण मानता है, तो कोई स्वभाव को । यही नही, कोई नियति को कारण मानता है और अदृष्ट को । कोई इन चारों को कारण न मान कर केवल पुरुषार्थ को ही कारण मानता है। इस प्रकार कारण के सम्बन्ध में विभिन्न मत हैं । एक कारणवादी दूसरे कारणवादी की मान्यता का तिरस्कार करता है। अतएव सभी एकान्त रूप से अपनी-अपनी मान्यता को अंगीकार किए हुए हैं । ये सभी विचार अपने आप में अपूर्ण हैं । इनमें किसी प्रकार की समन्वय दृष्टि नहीं है। इसलिए ये सम्यक नहीं हो सकते हैं । |