विशेष : द्रव्य, क्षेत्र, काल, भाव, पर्याय, देश, संयोग तथा भेद इनका आश्रय लेकर ही पदार्थों के प्रतिपादन का क्रम सम्यक् होता है।
- पदार्थों के त्रिकालवर्ती स्व-स्थान का नाम क्षेत्र है।
- परिणमन के समय की मर्यादा का नाम काल है ।
- पदार्थ में प्रतिसमय हो रहे अन्तरंग परिणमन का नाम भाव है तथा
- बहिरंग परिणमन पर्याय है ।
- बाहर में जहाँ पर पदार्थ स्थित है, उस स्थान का नाम देश है और
- उस समय की परिस्थिति संयोग है।
- उस पदार्थ का कोई-न-कोई नाम अवश्य होता है - यही भेद है ।
इस प्रकार इन आठ बातों की ध्यान मे रख कर ही किसी वस्तु का सम्यक् प्रतिपादन किया जा सकता है ।