+ पदार्थ के प्रतिपादन का क्रम -
दव्वं खेत्तं कालं भावं पज्जाय-देस-संजोगे ।
भेदं च पडुच्च समा भावाणं पण्णवणपज्जा ॥60॥
अन्वयार्थ : [दव्वं] द्रव्य [खेत्तं] क्षेत्र [कालं] काल [भाव] भाव [पज्जाय देससंजोगे] पर्याय देश संयोग [च] और [भेदं] भेद का [पडुच्च] आश्रय कर [भावाणं] पदार्थों की [पण्णवणपज्जा] प्रतिपादन (की) परिपाटी [समा] सम्यक्‌ है ।
Meaning : A proper exposition of Padarthas (categories) depends on Dravya (Substance), Ksetra (Space), Kala (Time), Bhava (modality), Paryaya (modificatory change), Desa (province), Samyoga (circumstances), and Bheda (distinction).

  विशेष 

विशेष :

द्रव्य, क्षेत्र, काल, भाव, पर्याय, देश, संयोग तथा भेद इनका आश्रय लेकर ही पदार्थों के प्रतिपादन का क्रम सम्यक्‌ होता है।
  • पदार्थों के त्रिकालवर्ती स्व-स्थान का नाम क्षेत्र है।
  • परिणमन के समय की मर्यादा का नाम काल है ।
  • पदार्थ में प्रतिसमय हो रहे अन्तरंग परिणमन का नाम भाव है तथा
  • बहिरंग परिणमन पर्याय है ।
  • बाहर में जहाँ पर पदार्थ स्थित है, उस स्थान का नाम देश है और
  • उस समय की परिस्थिति संयोग है।
  • उस पदार्थ का कोई-न-कोई नाम अवश्य होता है - यही भेद है ।
इस प्रकार इन आठ बातों की ध्यान मे रख कर ही किसी वस्तु का सम्यक्‌ प्रतिपादन किया जा सकता है ।