+ निश्चयनय की प्रधानता -
((सवैया तेवीसा))
ज्यौं नर कौइ गिरै गिरिसौं तिहि,
सोइ हितू जो गहैदिढ़बाहीं ।
त्यौं बुधकौ विवहार भलौ,
तबलौं जबलौं शिव प्रापति नाहीं ॥
यद्यपि यौं परवान तथापि,
सधै परमारथ चेतनमाहीं ।
जीव अव्यापक है परसौं,
विवहारसौं तो परकी परछाहीं ॥६॥