
जैसैं बनवारी में कुधात के मिलाप हेम,
नानाभांति भयौ पै तथापि एक नाम है ।
कसिकैं कसोटी लीकु निरखै सराफ ताहि,
बानके प्रवान करि लेतु देतु दाम है ॥
तैसैं ही अनादि पुद्गलसौं संजोगी जीव,
नव तत्त्वरूप मैं अरूपी महा धाम है ।
दीसै उनमानसौं उदोतवान ठौर ठौर,
दूसरौ न और एक आतमाही राम है ॥९॥