+ गुण-गुणी अभेद -
((सवैया तेवीसा))
सुद्धनयातम आतमकी,अनुभूति विज्ञान-विभूति है सोई ।
वस्तु विचारत एक पदारथ, नाम के भेद कहावत दोई ॥
यौं सरवंग सदा लखि आपुहि,आतम-ध्यान करै जब कोई ।
मेटि असुद्ध विभावदसा तब, सुद्ध सरूप की प्रापति होई ॥१४॥