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जिनराज का यथार्थ स्वरूप
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(दोहरा)
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जिनपद नांहि शरीरकौ, जिनपद चेतनमाँहि ।
जिनवर्नन कछु और है, यह जिनवर्नन नांहि ॥२७॥