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व्यवहार से जीव और शरीर एक, निश्चय से नहीं
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(कवित्त)
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तन चेतन विवहार एकसे, निहचै भिन्न भिन्न हैं दोइ ।
तनकी थुति विवहार जीवथुति, नियतद्रष्टि मिथ्या थुति सोइ ॥
जिन सो जीव जीव सो जिनवर, तन जिन एक न मानैकोइ ।
ता कारन तनकी संस्तुतिसौं, जिनवर की संस्तुति नहि होइ ॥३०॥