
दया-दान-पूजादिक विषय-कषायादिक,
दोऊ कर्मबंध पै दुहूको एक खेतु है ।
ज्ञानी मूढ़ करम करत दीसै एकसे पै,
परिनामभेद न्यारौ न्यारौ फल देतु है ॥
ज्ञानवंत करनी करै पै उदासीन रूप,
ममता न धरै तातै निर्जराकौ हेतु है ।
वहै करतूति मूढ़ करै पै मगनरूप,
अंध भयौ ममतासौं बंध-फल लेतु है ॥23॥