((सवैया इकतीसा))
दरबकी नय परजायनय दोऊ,
श्रुतज्ञानरूप श्रुतज्ञान तो परोख है ।
सुद्ध परमातमाको अनुभौ प्रगट तातें,
अनुभौ विराजमान अनुभौ अदोख है ॥
अनुभौ प्रवांन भगवान पुरुष पुरान,
ज्ञान औ विज्ञानघन महा सुखपोख है ।
परम पवित्र यौं अनंत नाम अनुभौके,
अनुभौ विना न कहूं और ठौर मोख है ॥३०॥