करता किरिया करमकौ, प्रगट बखान्यौ मूल ।
अब बरनौं अधिकार यह, पाप पुन्न समतूल ॥१॥
अन्वयार्थ :
कर्त्ता, क्रिया और कर्म का स्पष्ट रहस्य वर्णन किया। अब, पाप-पुण्य की समानता का अधिकार कहते हैं।