((सवैया इकतीसा))
संकलेस परिनामनिसौं पाप बंध होइ,
विसुद्धसौं पुन्न बंध हेतु-भेद मानीयै ।
पापके उदै असाता ताकौ है कटुक स्वाद,
पुन्न उदै साता मिष्ट रस भेद जानियै ॥
पाप संकलेस रूप पुन्न है विसुद्ध रूप,
दुहूंकौ सुभाव भिन्न भेद यौं बखानियै ।
पापसौं कुगति होइ पुन्नसैं सुगति होइ,
ऐसौ फलभेद परतच्छि परमानियै ॥५॥