((सवैया इकतीसा)) सील तप संजम विरति दान पूजादिक, अथवा असंजम कषाय विषैभोग है । कोऊ सुभरूप कोऊ अशुभ स्वरूप मूल वस्तुके विचारत दुविध कर्मरोग है ॥ ऐसी बंधपद्धति बखानी वीतराग देव, आतम धरममैं करम त्याग-जोग है । भौ-जल-तरैया राग-द्वैषकौ हरैया महा, मोखको करैया एक सुद्ध उपयोग है ॥7॥