((सवैया इकतीसा))
मुकतिके साधककौं बाधक करम सब,
आतमा अनादिकौ करम मांहि लुक्यौ है ।
एते पर कहै जो कि पाप बुरौ पुन्न भलौ,
सोई महा मूढ़ मोख मारगसौं चुक्यौ है ॥
सम्यक सुभाउ लिये हियमै प्रगट्यौ ग्यान,
उरध उमंगि चल्यौ काहूपै न रुक्यौ है ।
आरसीसौ उज्जल बनारसी कहत आपु,
कारन सरूप हैके कारजकौं ढुक्यौ है ॥१३॥