nikkyjain@gmail.com

🙏
श्री
Click Here

तू तो समझ समझ रे
Karaoke :
राग : असावरी, आतम अनुभव करना रे भाई

तू तो समझ समझ रे भाई !
निशिदिन विषय भोग लपटाना, धरम वचन न सुहाई ॥टेक॥

कर मनका लै आसन माड्यो, वाहिज लोक रिझाई ।
कहा भयो बक-ध्यान धरेतैं, जो मन थिर न रहाई ॥
तू तो समझ समझ रे भाई ॥१॥

मास मास उपवास किये तैं, काया बहुत सुखाई ।
क्रोध मान छल लोभ न जीत्या, कारज कौन सराई ॥
तू तो समझ समझ रे भाई ॥२॥

मन वच काय जोग थिर करकैं, त्यागो विषयकषाई ।
'द्यानत' सुरग मोख सुखदाई, सद्गुरु सीख बताई ॥
तू तो समझ समझ रे भाई ॥३॥



अर्थ : अरे भाई ! तू अब तो समझ, विवेकपूर्वक विचार कर । दिन-रात तू विषयभोग में उलझ रहा है, लिपट रहा है, तुझे धर्म का उपदेश, धर्म के वचन तनिक भी नहीं सुहाते - अच्छे नहीं लगते।

तू लोक-दिखाने के लिए, माला की मणि को हाथ में थामकर आसन लगाकर बैठता है और लोगों को रिझाता है, तू अपने आपको धर्मात्मा के रूप में दिखाता है। अरे जब तेरा मन चंचल होकर भटक रहा है तो बगुले की भांति ध्यान लगाने से क्या लाभ है?

तूने एक-एक मास के उपवास करके काया को अत्यन्त कमजोर/ शिथिल कर लिया, सुखा लिया । इस काया को कृश कर दिया लेकिन क्रोधमान-माया और लोभ, इन कषायों को नहीं जीता, वश में नहीं किया, तो तेरा कौनसा कार्य सिद्ध होगा?

मन, वचन, काय इन तीनों योगों को थिर करके, विषय वासना, कषायों को छोड़। द्यानतराय कहते हैं कि यह ही सद्गुरु का उपदेश है। इससे ही स्वर्ग व मोक्ष की, लौकिक व पारलौकिक सुख की प्राप्ति होती है।
Close

Play Jain Bhajan / Pooja / Path

Radio Next Audio

देव click to expand contents

शास्त्र click to expand contents

गुरु click to expand contents

कल्याणक click to expand contents

अध्यात्म click to expand contents

पं दौलतराम कृत click to expand contents

पं भागचंद कृत click to expand contents

पं द्यानतराय कृत click to expand contents

पं सौभाग्यमल कृत click to expand contents

पं भूधरदास कृत click to expand contents

पं बुधजन कृत click to expand contents

पर्व click to expand contents

चौबीस तीर्थंकर click to expand contents

दस धर्म click to expand contents

selected click to expand contents

नित्य पूजा click to expand contents

तीर्थंकर click to expand contents

पाठ click to expand contents

स्तोत्र click to expand contents

द्रव्यानुयोग click to expand contents

द्रव्यानुयोग click to expand contents

द्रव्यानुयोग click to expand contents

loading